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बीएड के बढ़े हुए फीस के संदर्भ में शिकायत करने कें बाद भी अबतक विश्वविद्यालय ने नहीं दिया स्पष्ट जवाब -

 ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (सत्र 2018-20) के तमाम बीएड के छात्र विश्वविद्यालय से फीस के संदर्भ में यह पूछना चाहता है कि उन्हें आखिरकार कितना शुल्क देना है ? अगर विश्वविद्यालय के पास उपयुक्त शुल्क वृद्धि संबंधित कागजात है,तो विश्वविद्यालय स्पष्ट रूप से क्यों नहीं 1.5 लाख शुल्क लेने की नोटिस अभी तक जारी कर रही है या वेबसाइट पर अपलोड  कर रही है ? आपको विदित हो जिस पत्रांक को विश्वविद्यालय ने पुनः लागू किया है 1-7-2019  के पत्रांक में भी कहीं पर यह उल्लेखित नहीं है कि छात्रों को 1.5 लाख शुल्क ही देना है । सिर्फ उसमें उससे अधिक लेने की मनाही की बात की गई है । आपको विदित हो जो विश्वविद्यालय बार-बार जिस अवहेलना की चर्चा कर रही है, उस अवहेलना की सही व्याख्या नहीं कर रही है, क्योंकि वह अवहेलना शुल्क वृद्धि संबंधित है ही नहीं । छात्रों का कहना है कि वास्तविकता तो यह है कि विश्वविद्यालय निजी कॉलेजों के दबाव में आकर छात्रों के साथ शब्दों के खेल की चक्रव्यूह रच रही है, इसलिए स्पष्ट रूप से शुल्क वृद्धि संबंधित नोटिस नहीं निकाल रही है । वैश्विक महमारी के आर्थिक तंगी में भी फीस के संदर्भ में विश्वविद्यालय द्वारा स्पष्ट जानकारी   विभिन्न निजी कॉलेजों को न देने की वजह से वर्तमान में पुनः इन कॉलेज द्वारा अतरिक्त शुल्क 35,000 की नोटिस भेजा गया । साथ ही साथ कई  कॉलेजों में तो इन दिनों जमा करने का अंतिम तिथि भी निर्धरित  किया गया है । जिसके कारण वैश्विक महमारी के आर्थिक तंगी से आए दिन छात्रों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है । साथ ही साथ छात्र विश्वविद्यालय एवं राज्य सरकार से पूछना चाहती है कि इस विश्वव्यापी महामारी एवं महामंदी के दौर में 35,000 शुल्क वृद्धि करना कहां तक न्यायोचित हो रहा है, इसे छात्र हित में अविलंब से अविलंब वापस लिया जाए । वर्तमान में छात्रों को शिक्षित बेरोजगार एवं बिना डिग्री लिए हुए पढ़ाई छोड़ने का डर सता रहा है, उससे मुक्ति किया जाए ।



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