वर्तमान में आम लोगों की वास्तविक सच्चाई:-
देश के तमाम वासियों को मैं स्पष्ट और पूर्ण रुप से सच्चाई से अवगत कराकर यह कहना चाहता हूं कि इन दिनों देश में गरीबी ,बेरोजगारी,अशिक्षा और भ्रष्टाचारी बहुत ज्यादा बढ़ चुका है । इन दिनों स्कूल-कॉलेज के बंद हो जाने की वजह से शिक्षित छात्र का भी कैरियर अंधकार में जा रहा है । साथ ही साथ जिन छात्रों को वर्षों से उनके शिक्षक तथा उनके अभिभावकों द्वारा संपूर्ण ज्ञान के माध्यम से उनके दैनिक जीवन में परिवर्तन लाने का कार्य करके देश के भविष्य निर्माण कर्ता और सृजन कर्ता बनाया गया । उन पर भी इन दिनों शिक्षण संस्थान बंद हो जाने एवं कई अन्य व्यवस्थाओं की वजह से अब इन दिनों पानी फिर चुका है अर्थात शिक्षक और अभिभावक का सारा मेहनत बेकार चला गया । काफी लंबे समय तक शिक्षण संस्थान बंद हो जाने की वजह से छात्रों में पूर्व की आदतें अब धीरे-धीरे समाप्त हो चुका है । इन आदतों को शिक्षण संस्थान खुलने के बाद पूर्व की तरह कायम रखने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा । अब इन संपूर्ण चीजों के लिए सिर्फ सरकार दोषी होंगे । उन्हें वैश्विक महामारी के काल में अन्य चीजों की तरह सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए शिक्षण संस्थानों को अर्थात शिक्षण व्यवस्था को अल्टरनेट तरीका से जारी रखना चाहिए । इन दिनों गरीब और अधिक गरीब बन रहा है तथा धनी और अधिक धनी बन रहा है । यह संपूर्ण स्थिति गरीब, लाचार और बेबस जनताओं को शोषण करके इंसानियत को शर्मसार करने वाले गंदी मानसिकता वाले लोगों द्वारा उनका हक की मांग की पूर्ति न करके सरकार की विभिन्न योजनाओं में लूट खसोट और भ्रष्टाचारी को दर्शा रहा । वैश्विक महामारी के काल में सभी को मिलकर इसके खिलाफ आंदोलन या खड़ा उतारने की इन दिनों हम युवाओं के साथ-साथ आम नागरिकों को भी बेहद जरूरी है । ये तमाम बातें हर छात्रों, शिक्षकों, व्यापारी और देश के आम नागरिकों के वर्तमान की वास्तविक और काफी जटिल समस्या है । जो बिहार से लेकर तमाम देशवासियों के वास्तविक परिस्थिति को दर्शा रहा है । सभी को इसके लिए जगने की जरुरत है तभी जाकर वैश्विक महामारी के काल या वैश्विक महामारी के सामान्य स्थिति के बाद हर दृष्टिकोण से स्थिति में सुधार आ पाएगा और यह सुधर आने से सिर्फ हमारे और आपके लिए खुशी की बात नहीं होगी । बल्कि इन नई संपूर्ण व्यवस्था के बाद संपूर्ण देशवासियों के चेहरे पर मुस्कान और खुशी की झलक देखने को मिलेगा ।
