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*नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ से प्रेरित ‘विकसित बगहा’ की कल्पना – अंकित देव अर्पण*

_रमेश ठाकुर - बगहा पश्चिम चंपारण,बिहार_

_दिनांक:- 12-07-2025_


शनिवार को बगहा शहर स्थित मारवाड़ी धर्मशाला में युवा समाजसेवी अंकित देव अर्पण द्वारा जनसंवाद कार्यक्रम एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उन्होंने "संकल्प विकसित बगहा" के तहत बगहा के सर्वांगीण विकास का खाका प्रस्तुत किया और आगामी विधानसभा चुनाव में भाग लेने की घोषणा की।

कार्यक्रम में बगहा के विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से आए 500 से अधिक लोगों की उपस्थिति रही। संचालन उज्ज्वल शुक्ला ने किया। कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य सोनू यादव, महंत राम, अलाउद्दीन अंसारी और अभिषेक कुशवाहा ने अंकित देव अर्पण के राजनीतिक पदार्पण का प्रस्ताव रखा।


बगहा की उपेक्षा पर जताई चिंता

अपने संबोधन में अंकित देव अर्पण ने कहा कि बगहा जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षेत्र को वर्षों से दरकिनार किया गया है। "यह लव-कुश की शिक्षा भूमि और महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि रही है, लेकिन आज यहां शिक्षा, रोजगार, उद्योग और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।"

उन्होंने कहा कि बगहा के छात्र आज भी शिक्षा के लिए दिल्ली, पटना, कोटा, बनारस जाने को मजबूर हैं, क्योंकि स्थानीय स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। रोजगार के अभाव में युवा 6000 की नौकरी के लिए दिल्ली, गुजरात, मुंबई जैसे शहरों में पलायन कर रहे हैं, और रेल हादसों में जान तक गंवा रहे हैं।


औद्योगिक पिछड़ापन और किसान संकट

उन्होंने बगहा में टेक्सटाइल पार्क जैसी योजनाएं न आने पर नाराजगी जताई और कहा कि स्थानीय किसान 5 रुपए में आलू बेच रहे हैं जबकि उनके बच्चे 10 ग्राम चिप्स 5 रुपए में खरीद रहे हैं। "यहां उद्योग लगाकर किसानों को समृद्ध किया जा सकता है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है।"


महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी शिक्षा की मांग

अंकित देव अर्पण ने गृह मंत्री द्वारा लाए गए तीन नए कानूनों का स्वागत करते हुए कहा कि साइबर थानों, फोरेंसिक लैब और मोबाइल फोरेंसिक यूनिट की व्यवस्था होनी चाहिए, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में ताकि महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण संभव हो सके।


स्वास्थ्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में दम तोड़ रही हैं। अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते दो-दो मौतें हो रही हैं, लेकिन प्रतिनिधियों को इससे कोई सरोकार नहीं है। उन्हें इस बात पर गर्व नहीं करना चाहिए कि लोग इलाज के लिए पटना आते हैं, बल्कि प्रयास हो कि उन्हें बाहर जाना ही न पड़े।"


डिजिटल युग में तकनीकी नेतृत्व की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि आज डिजिटल युग में साइबर फोरेंसिक और सूचना प्रौद्योगिकी पर सदन में चर्चा आवश्यक है। ऐसे प्रतिनिधियों की जरूरत है जो इन जटिल विषयों को समझें और उन पर नीति-निर्माण कर सकें।


राष्ट्रीय संस्थान की मांग और राजनीतिक घोषणा

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने मांग की कि बगहा में राष्ट्रीय स्तर के संस्थान जैसे NFSU (National Forensic Sciences University) या RRU (Rashtriya Raksha University) की स्थापना हो, साथ ही एक आयुर्वेदिक महाविद्यालय भी स्थापित किया जाए।


अंत में उन्होंने घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे और दावेदारी प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बिहार की राजनीति में शिक्षित नेतृत्व की जरूरत बताते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनन मिश्रा का उदाहरण दिया, जो बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं।

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