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*रामनगर में सामाजिक न्याय की खुली चुनौती – आंखों से अंधा, न्याय से वंचित*

 


_विशेष संवाददाता - बेतिया पश्चिम चंपारण_

_दिनांक:- 19-07-2025_


गरीब और अमीर के लिए अलग-अलग व्यवस्था है — यह कहावत एक बार फिर पश्चिम चंपारण के रामनगर अंचल में सच साबित हो रही है। महुई पंचायत के वार्ड नंबर 15 के बरगजवा निवासी हरेंद्र मुसहर, जो दोनों आंखों से अंधे और दिव्यांग हैं, आज भी न्याय की गुहार लगाने को मजबूर हैं।

हरेंद्र मुसहर के पिता, स्वर्गीय शिव मुसहर को कई वर्ष पूर्व भू-हदबंदी अधिनियम के तहत मौजा पकड़ी, पंचायत धोकराहा, अंचल व थाना – रामनगर, थाना संख्या – 611, जमाबंदी संख्या – 334, खाता संख्या – 18, खेसरा संख्या – 619, रकबा – 31 डिसमिल ज़मीन आवंटित की गई थी। वर्तमान में उक्त ज़मीन शिव मुसहर के नाम से जोत-आबाद में दर्ज है और जमाबंदी भी चल रही है।


लेकिन अब इस ज़मीन पर धोकराहा पंचायत के पकड़ी (हरिजन टोली) निवासी जन वितरण प्रणाली डीलर उमेश राम (पिता – स्व. रामप्रसाद राम उर्फ बुन्नी राम) द्वारा जबरन कब्जा कर लिया गया है। आरोप है कि उन्होंने इस ज़मीन पर बिना अनुमति के ईंट का मकान बनवा दिया है और अब छत ढलाई की तैयारी की जा रही है – वह भी प्रशासन की मिलीभगत से।

हरेंद्र मुसहर ने बताया कि उमेश राम एक प्रभावशाली और दबंग व्यक्ति हैं जिनकी पहुंच "ऊपर तक" है। उन्होंने 18 जुलाई 2025 को खुद आकर धमकी दी कि “19 या 20 जुलाई तक छत की ढलाई करूंगा, जो पैसा तुझे दूंगा वही पैसा प्रशासन में खर्च कर दूंगा।”


दिव्यांग हरेंद्र ने इस मामले में रामनगर थाना में तीन बार आवेदन दिया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने अब डीआईजी चंपारण रेंज और बगहा एसपी से न्याय की गुहार लगाई है।


जब इस संबंध में डीलर उमेश राम से सवाल पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि उन्होंने शिव मुसहर से ज़मीन की "रजिस्ट्री" करवा ली है। सवाल यह उठता है कि क्या भू-हदबंदी (सेलिंग एक्ट) की ज़मीन रजिस्ट्री हो सकती है? अगर हां, तो किस सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में यह रजिस्ट्री हुई?


अब जरूरत है कि रामनगर अंचलाधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें और जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करें, ताकि इस अंधे और गरीब दिव्यांग को न्याय मिल सके।

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