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*पश्चिम चंपारण के भंगहा पंचायत में फर्जी आशा बहाली का खुलासा*

_रमेश ठाकुर के साथ अब्दुल बासित, (पश्चिम चंपारण)_

_दिनांक:- 24-07-2025_


मैनाटांड़ प्रखंड अंतर्गत भंगहा पंचायत के वार्ड संख्या 13 में आशा कार्यकर्ता की बहाली में गंभीर अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बहाली प्रक्रिया में न तो ग्राम सभा की बैठक बुलाई गई, न ही वार्ड सदस्य को इसकी जानकारी दी गई। वहीं, जिस महिला का चयन आशा कार्यकर्ता के रूप में किया गया है, वह पहले से ही आशा के पद पर कार्यरत महिला के परिवार से ही संबंध रखती है, जो कि सरकारी नियमों के विरुद्ध है।


इस मामले की जानकारी मिलने पर जदयू प्रखंड अध्यक्ष सह बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति मैनाटांड़ के अध्यक्ष श्री संजय पटेल खुद मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के बीच जांच की। उन्होंने संबंधित दस्तावेजों और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर स्पष्ट किया कि आशा बहाली प्रक्रिया पूरी तरह नियमों की अनदेखी कर की गई है। उन्होंने कहा कि न तो किसी प्रकार की आमसभा बुलाई गई और न ही स्थानीय प्रतिनिधियों को जानकारी दी गई, जो कि ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की पारदर्शी नियुक्ति प्रक्रिया का उल्लंघन है।


श्री पटेल ने इस फर्जी बहाली को गंभीर मामला मानते हुए कहा कि समिति इस पर पूरी गंभीरता से कार्रवाई करेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस तरह की गड़बड़ी न केवल गरीब व जरूरतमंद महिलाओं के अधिकारों का हनन है, बल्कि सरकारी योजनाओं की साख पर भी सवाल खड़ा करती है।


मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पूरी चयन प्रक्रिया चुपचाप कुछ लोगों की मिलीभगत से कर दी गई। कई स्थानीय लोगों ने इस बहाली को रद्द कर दोबारा निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत योग्य अभ्यर्थियों को मौका देने की मांग की है।


इस पूरे प्रकरण पर अभी तक प्रखंड स्वास्थ्य विभाग या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की अनियमितताएं बर्दाश्त की जाती रहीं, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।


अब देखना यह होगा कि प्रखंड व जिला प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और दोषियों को कब तक कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाता है। फिलहाल ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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