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*पश्चिमी चंपारण में राजेश श्रीवास्तव हत्याकांड के आरोपी क्या सचमुझ में भाग गए नेपाल?*

ठाकुर रमेश शर्मा(मानवाधिकार  एवं अपराध विशेषज्ञ)_

_रामनगर, प ० चम्पारण (बिहार)_

 _16-12-2022_



अपराधियों का अपराध पकड़ में आ जाता है परंतु पुलिस अपने द्वारा किए हुए अपराध को ड्यूटी अनुसंधान का हिस्सा मानकर काम करती है। वह चाहे बिहार की हो ,यूपी की हो,हरियाणा, पंजाब या जम्मू कश्मीर की हो, इनकी चाल-ढाल, रॉब- रुआब तथा पोशाक लगभग एक ही जैसी होती है।

इन्हें जो सेवा मिली है उससे विधाता का वरदान नहीं बल्कि अपने अवतरण का अधिकार समझकर आम जनों पर शासन करते हैं जबकि इन्हें यह नहीं पता कि इनकी दशा विधाता कब पंचकूला (हरियाणा) वाले रविकांत शर्मा जैसी कर दे।

इन दिनों बिहार की सत्ता डामाडोल है। कौन जनता है कब माता पटन देवी की निगाहें एनेक्सी यानी सचिवालय के तरफ घूम जाए और हो जाए उलटफेर ?

 कभी शराब कांड,कभी कुछ कभी कुछ। वैसे भी हमारे मुख्यमंत्री परिवर्तन के प्रयास करने वास्ते कभी भी किसी भी समय दिल्ली के तरफ मुखातिब हो सकते हैं। तो राजगद्दी युवराज तेजस्वी के तेज गति से चलेगी क्या ?

अब रुख करते हैं हम चंपारण के तरफ जो एक महान समाजसेवी राजेश श्रीवास्तव के हत्याकांड से शुरू होकर पता नहीं किस-किस निर्दोषों को आत्महत्या करने पर मजबूर करेगा। अभी हमारे पश्चिमी चंपारण के चहेते नेता भाजपा के राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र दुबे ने जंगलराज की संज्ञा देकर पुनः एक बार 1990 से लेकर 2005 वाला दौर आने की अंदेशा बताकर गृह मंत्रालय भारत सरकार से भारत के उच्च सदन का ध्यान आकृष्ट विगत दिनों में कराया था। क्या हुआ संज्ञान ?

इस हत्याकांड की सूक्ष्म कड़ी एक विशेष टीम फिरदौस अख्तर को क्यों नहीं नेपाल से ढूंढ लेती जैसे पूर्व में लौरिया के काबिल थानेदार जे पी यादव ने नेपाल से पुट्टू मिश्रा को वर्षों पहले ढूंढकर बॉर्डर तक लाकर अपनी काबिलियत का नमूना पेश किया था।

बेतिया में चंद दिनों पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल ने अपने बयान में बताया कि अगर किसी की दीदी अपने मेरिट पर डीएम बनकर इमानदारी से पैसा कमा रही है तो भाई भी निर्दोष को फंसाकर नहीं कमा सकता है। रुपया तो दिल्ली पुलिस के कमिशनर रहे निखिल कुमार ने भी कमाया था,जिनकी बहन कैबिनेट मंत्री थी तथा भाई C.P में दिल्ली पुलिस में रहकर 1 रुपया तनख्वाह दरमाहा के रूप में लेकर राज्यपाल भी रहे। जो आज के इतिहास के पन्नों में लिखा जाना चाहिए। अगर निखिल कुमार चाहते तो मेंहरौली से लेकर यमुनापुर,छतरपुर, धीटोरनी, आयानगर से (D.L.F) तक कहीं भी फार्म हाउस ले लेते। परंतु क्यों नहीं लिया ?

आज के पुलिस अधिकारी दिल्ली में फ्लैट के गूगल में निर्दोष को फंसाकर क्या उन फार्म हाउस या दिल्ली के फ्लैटों में चैन की नींद सो पाएंगे ? इनके गुर्दे, किडनी,दिल लोहे के हैं ?

   अभी सुगर रूपी रिपेसिप्स निष्ट ने शरीर में कदम रख दिया है।फिर भी भाई क्यों पत्थर दिल अपने दिल को बना रखा है,कहीं दिल का दौरा ना पड़ जाए ! किसी हाथ ना लग जाए । 

100 दोषी क्यों न छूट जाए परंतु एक भी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। हमारा बस चले तो अपराध होने वाले क्षेत्र के एसडीपीओ के सभी सरकारी, प्राइवेट (निजी) नंबरों का C.D.R निकाले तो कहीं अपराधी उनके मित्रों के पास तो नहीं मिल कर घटना का प्लान किया ?

कहीं प्रॉपर्टी डीलर राजेश श्रीवास्तव के प्रॉपर्टी टाटा,बिरला वाले सातिर ने तो नहीं निगल लिया। वे ऐसे मगरमच्छ है जो दिव्य दृष्टि वालों को दिखते है।

    इस हत्याकांड का जिम्मा बिहार के डीजीपी महोदय ए ०के० सिंघल साहब के आदेश से आरक्षी उपमहानिरीक्षक महोदय बेतिया पश्चिम चंपारण रेंज प्रणव कुमार प्रवीण के नेतृत्व में देना चाहिए तभी निर्दोष बचेंगे तथा असली अपराधियों जो मासूम लग रहे हैं,परंतु है नहीं - पकड़े जाएंगे। क्योंकि मिसाल के लिए डालमिया, टाटा,बिरला वाले ही जैसे क्यों न हो परंतु बचेंगे नहीं।

    नरकटियागंज में पुलिस चाहे जो करे ,मीडिया चाहे जो लिखे,परंतु आम जन मानस जो वोट की मशीन अपने को समझ रखा है,चुप नहीं रहेगी। यहां असली बात लोग चौक - चौराहों पर खूब बोल रहे हैं।पुलिस चाहे C.I.D से या गुप्तचर से पता करे,जनता दूध की दूध और पानी की पानी बोलती नजर आ रही है।

  जब - जब पुलिस प्रशासन की गाड़ी निकलती है,"आप किस किस का मुंह बंद करेंगे" जनता है,बोलती रहेगी।

15 दिसंबर के उच्च अधिकारियों के नेतृत्व में संयुक्त छापेमरी का क्या अच्छा निकलेगा नतीजा?

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