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*बिहार के चंपारण में मनाया गया मानवाधिकार दिवस*

 


*अंधा बांटे रेवड़ी अपने-अपने को दे ?*

 _ठाकुर रमेश शर्मा- मानवाधिकार एवं अपराध रिपोर्टर_

 _रामनगर, प ० चम्पारण (बिहार)_

 _12 दिसंबर 2022_


10 दिसंबर को जहां पूरे भारत में मानवाधिकार दिवस दिसंबर महीने में पूरी तैयारी और शालीनता के साथ प्रतिवर्ष मनाया जाता है क्योंकि 1990 में भारत के नेताओं के मन में भारत के अंतिम पंक्तियों में खड़े व्यक्ति के मौलिक अधिकार की चिंता हुई। तत्पश्चात उन्होंने केन्द्र स्तर पर विधेयक लगाकर प्रस्ताव पारित करते हुए आम जनों के हितों की रक्षा के लिए वर्ष 1993 में राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद गठन  करा ही लिया।

आज हर गरीब उनके लिए आंसू बहा कर एक बात उन प्रगतिशील नेताओं के बारे में पूछता है रो-रोकर और कहता है "कहां गए वह लोग" ? जी हां जिन्होंने मानव के मौलिक अधिकारों के लिए गठन कर गए "राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग" । 10 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू,भारत के सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश,भारत के दिलों की धड़कन प्रधानमंत्री भाई दामोदरदास मोदी के नेतृत्व में मनाया गया। ठीक उसी प्रकार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, उनके दल के सहयोगीयों, विधायकों,मंत्रियों के सहयोग से मनाया गया। साथ ही बिहार राज्य के पश्चिमी चंपारण जिले के चखनी रजवटिया के रजवटिया निवासी सेवानिवृत्त डॉक्टर मदन बिहार प्रसाद श्रीवास्तव के पैतृक निवास स्थान में उनके सुपुत्र भारत के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ संपादक सह भारतीय युवा पत्रकार संगठन  व इकोनॉमी इंडिया के चीफ एडिटर के नेतृत्व में वृहद आयोजन के साथ वरिष्ठ मीडिया कर्मियों,समाजसेवियों,नेताओं के रूहानी जिस्मानी सहयोग से दिनांक 10 दिसंबर 2022 को हर वर्ष की भांति मनाया गया।


इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सेमरा ओझवलिया बगहा से आए महान समाजसेवी श्री अंबिका सिंह के पुत्र वरिष्ठ पत्रकार अमिट लेख पत्रिका के मुख्य संपादक अमरेश सिंह, V YES TIME के रिपोर्टर विजय शर्मा चखनी-मानव अधिकारों के विशेषज्ञ, समीक्षक पत्रकार-ठाकुर रमेश शर्मा- रामनगर,पश्चिमी चंपारण बिहार,सैलेश मणि (पुरैनिया),अमित तिवारी(मलदा- मलदी), नरकटियागंज के सतीश पांडेय,अर्जुन भारतीय (वरिष्ठ पत्रकार),सतीश पांडे -2 (त्रिभवनी- महान विद्वान),विकाश पांडेय (रामनगर),महान विद्वान अवधकिशोर पांडेय , अतुल्य कुमार पाण्डेय ,वरिष्ठ सिक्षक सुनील सिंह(सत्यार्थी) तौलाहा, बगहा के पत्रकारों का समूह जो नारायणी प्रेस क्लब के सदस्य , बिनवलिया(नरकटियागंज) निवासी वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी भाई अजरूद्दीन मिया,रामनगर से फूल देवराजी , मोतिऊर्र रहमान (नेता) कांग्रेस पार्टी , मुखिया संघ के अध्यक्ष अफसर इमाम, सबेया से भाई रहमान उर्फ नेताजी ,महूई से समाजसेवी साबिर मियां, झरमहुई थाना चौतरवा से रायबारी,महुवआ से भाई दिनमान पांडे,प्रभु शर्मा(किन्नर)।

प्रभु जी ने अपने बयान में बताया कि आज किन्नर समाज जो उपेक्षित था,इसी मानव अधिकार आयोग के चलते ही ट्रेन,बसों में सिर उठाकर चलते हुए मंजिल तक पहुंच जाता है। रामनगर से शेख औरंगजेब ने तो 10 दिसंबर को उत्पीड़न समाज के उत्थान का दिवस कह कर संबोधित किया। रामनगर से आए वरिष्ठ पत्रकार अधिवक्ता राजेश द्विवेदी ने इस मानव अधिकार दिवस को मानव जागरूकता दिवस बताकर वक्तव्य किए। स्वास्थ्य सेवा रामनगर - डैनमरवा, आर एन चिकित्सा रामनगर केंद्र रामनगर के संचालक भाई एकलाख (मानवाधिकार कार्यकर्ता) ने भी अपना विचार रखते हुए हमेशा सेवा की बात की।

भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक स्वायत्त विधिक संस्था है। इसकी स्थापना 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी। इसकी स्थापना मानवाधिकार सरक्षण अधिनियम, 1993 के अन्तर्गत की गयी। यह आयोग देश में मानवाधिकारों का प्रहरी है। यह सविंधान द्वारा अभिनिश्चित तथा अन्तरराष्ट्रीय सन्धियों में निर्मित व्यक्तिगत अधिकारों का संरक्षक है। यह एक बहु सदस्यीय निकाय है। इसके प्रथम अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र थे। वर्तमान में (2021)न्यायमूर्ति अरुण कुमार मिश्रा इसके वर्तमान अध्यक्ष के पद पर आसीन है। इसके अध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष (जो भी पहले पूर्ण हो जाए)। इसके अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक गठित समिति की सिफारिश पर होती है।

 राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन पेरिस सिद्धान्तों के अनुरूप है जिन्हें अक्तूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अन्तरराष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसम्बर, 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्प 48/134 के रूप में समर्थित किया गया था।

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