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*लाखो प्रयास के बाद क्यों नहीं बंद हो रहा है यह धंधा लॉटरी का ?*

 


_ठाकुर रमेश शर्मा_

_रामनगर पश्चिमी चंपारण_ _(बिहार)_

_दिनांक - 29- 11-2022_ _( मानवाधिकार एवं अपराध विषेश)_

 विगत दिनों जब उत्तर बिहार का लॉटरी माफिया उपेन्द्र सहनी का स्वर्गवास हो गया था तब ऐसा लगा था कि शायद अब रॉयल बंगाल प्रतिबंधित लॉटरी का खात्मा हो जाएगा परंतु , उस कूर्सी को किसी दूसरे बड़े माफिया ने अपने कब्जे में लेकर अपनी बादशाहत कायम कर लिया है।

इसीलिए तो इन दिनों  बड़े ही जोर से पुनः यह धंधा बड़े पैमाने पर,बगहा,चनपटिया,बेतिया रामनगर तथा लौकरिया थाना क्षेत्र तमकुहाटाड बाशी नदी के किनारे एवं मुख्य रूप से नरकटियागंज पुलिस अनुमंडल के सिकटा में फलने फूलने लगा है। नगर मेंअवैध लॉटरी फल फूल रहा है धंधा करने वाले का मोटी कमाई का एक सरल रास्ता मिल गया है और इस धंधे में रोजाना मेहनत कर घर का रोजी चलाने वाले लाखो का सपना देखते हुए खुद को बर्बाद होते जा रहे है 

नगर में कई जगहो पर, पान दुकान, चाय दुकान, सैलून जैसे छोटे बड़े दुकानो और पौकिट में लौट्रिओ को रख कर इस काम को करने में कई अजेन्ट्स रूप में लोग काम कर रहे है ॥

प्रशासन इस पर ध्यान दें विनती है, अन्यथा कितने लोग इसका शिकार हो रहे है बर्बाद हो रहे है। अगर बिहार सरकार इस धंधे को रोकने में कामयाब नही हो पा रही है तो वैध्य। लाइसेंस देकर राजस्व की उगाही कर ही लेना चाहिए क्योंकि किसी धंधे पर प्रतिबंध का मतलब पुलिस प्रशासन के कमाई का जरिया बन जाता है।

आखिर कब रुकेगा यह धंधा?

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