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PM गति शक्ति पोर्टल के डेटा से तैयार होगा DPR, BISAG-N के सहयोग से डिजिटल टूल विकसित, आपदा प्रबंधन, निगरानी और अवसंरचना योजना में BIRSAC की भूमिका और सशक्त करने पर जोर!*

 


 _रमेश ठाकुर_ 

 _रामनगर - नरकटियागंज,_ _प०चम्पारण (बिहार)_ 

 _14-01-2026_ 


पटना।

राज्य के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) द्वारा संचालित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित रहे।

बैठक में BIRSAC की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि संस्थान राज्य में प्राकृतिक संसाधनों एवं विभागीय परिसंपत्तियों का जियो-स्पैशियल इन्वेंट्री निर्माण, योजना एवं विकास कार्यों हेतु स्पैशियल डेटा उपलब्ध कराने, आपदा निगरानी एवं ग्राम स्तर पर जियो-स्पैशियल डेटाबेस निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य में ₹50 करोड़ अथवा उससे अधिक लागत की सभी अवसंरचना परियोजनाओं के DPR में जियो-स्पैशियल एनालिटिक्स को अनिवार्य ऐड-ऑन के रूप में शामिल किया जाएगा। इसके तहत संबंधित विभाग को परियोजना लागत का मात्र 0.25 प्रतिशत शुल्क BIRSAC को देना होगा। उन्होंने कहा कि इससे संस्थान को वित्तीय मजबूती मिलेगी और राज्य पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि ऐसी सभी परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति से पूर्व BIRSAC से तकनीकी अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि अवसंरचना विकास को वैज्ञानिक, डेटा-आधारित और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए जियो-स्पैशियल सेवाओं का उपयोग अब वैकल्पिक नहीं बल्कि आवश्यक है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से DPR निर्माण हेतु एक डिजिटल टूल विकसित किया जा रहा है, जो PM गति शक्ति पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न विभागीय डेटा का उपयोग कर परियोजनाओं की योजना एवं अलाइनमेंट को अधिक सटीक बनाएगा।

उपस्थित विभागों ने माना कि इस व्यवस्था से कार्यों की पुनरावृत्ति रुकेगी, लागत में कमी आएगी तथा भूमि, वन एवं क्रॉस-ड्रेनेज जैसी संभावित बाधाओं की पहचान प्रारंभिक चरण में ही हो सकेगी। यह प्रणाली आपदा प्रबंधन और पराली जलाने जैसी गतिविधियों की निगरानी में भी सहायक सिद्ध होगी।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को पोर्टल पर कार्यों की प्रगति की नियमित अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने और अंतर-विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। उन्होंने BIRSAC के कार्यों की सराहना करते हुए संस्थान को तकनीकी एवं मानव संसाधन के स्तर पर और सशक्त बनाने पर बल दिया।

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