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*मकर संक्रांति पर विशेष योग, आठ घंटे तक रहेगा पुण्य स्नान का समय

_रमेश ठाकुर - गौनाहा,पश्चिम चंपारण_

_दिनांक:- 12-01-2026_


मकर संक्रांति का पावन पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पंडित जीवन पाण्डेय ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार मकर संक्रांति के दिन तिल द्वादशी का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।


उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी। इस वर्ष माघ मास की तिल द्वादशी के साथ वृद्धि योग का संयोग होने से स्नान, दान और पुण्य कर्म विशेष फलदायी माने जा रहे हैं।


ज्योतिषाचार्य के अनुसार 15 जनवरी को सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक लगभग आठ घंटे का पुण्यकाल रहेगा, जिसमें स्नान एवं दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने उनके घर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, इसी कारण इस दिन को मकर संक्रांति कहा जाता है।


पौराणिक कथाओं में भी इस दिन का विशेष महत्व है। महाभारत काल में भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही अपने शरीर का त्याग किया था। वहीं इसी दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में समाहित हुई थीं।


पंडित जीवन पाण्डेय ने बताया कि इस वर्ष 14 जनवरी की रात 9 बजकर 19 मिनट पर भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके कारण संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। मकर संक्रांति के साथ ही मौसम में भी परिवर्तन दिखाई देने लगता है और शीत ऋतु के धीरे-धीरे विदा होने का संकेत मिलता है।

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