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*बाबु धाम ट्रस्ट के संस्थापक एपी पाठक ने ठंड से बचाव के लिए प्रशासन से की विशेष व्यवस्था की अपील*

_रमेश ठाकुर - रामनगर पश्चिम चंपारण_

_दिनांक:- 07-01-2026_


पश्चिम चंपारण में पड़ रही भीषण ठंड और शीतलहर को देखते हुए बाबु धाम ट्रस्ट के संस्थापक एवं पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह एपी पाठक ने जिला प्रशासन से जनहित में तत्काल ठोस कदम उठाने की अपील की है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि इस कंपकंपाती ठंड में सभी सार्वजनिक चौराहों, सरकारी कार्यालयों, चीनी मिल परिसरों के हज़ारियों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड तथा प्रमुख मंडियों में अलाव जलाने की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


एपी पाठक ने यह भी सुझाव दिया कि सभी अनुमंडलों में तत्काल एक निगरानी अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो ठंड से बचाव संबंधी व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग करे। उन्होंने कहा कि अत्यधिक ठंड के बावजूद आमजन रोजमर्रा के कार्यों के लिए शहरों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने को मजबूर हैं, ऐसे में प्रशासन की सक्रियता अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी अधिकारियों से भी अस्पताल परिसरों में अलाव जलाने और ठंड से बचाव के आवश्यक प्रबंध करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही एपी पाठक ने प्रभावित पंचायतों के मुखिया एवं सरपंचों से भी अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए अलाव की व्यवस्था कराएं तथा हरसंभव सहयोग प्रदान करें।


गौरतलब है कि एपी पाठक ने बाबु धाम ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं को कुछ स्थानों पर अलाव की व्यवस्था करने और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से समन्वय बनाकर तुरंत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और अलाव जलाने हेतु निर्देशित किया था।

साथ ही बाबु धाम ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं को भी चिन्हित स्थानों पर प्रशासन का सहयोग करने को कहा।

यह सर्वविदित है कि एपी पाठक पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से हर वर्ष ठंड के मौसम में निरंतर सक्रिय रहते हुए गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सेवा करते आ रहे हैं। अब तक उनके प्रयासों से लाखों लोगों तक कंबल वितरण, प्रत्येक प्रखंड में चिन्हित स्थलों पर अलाव की व्यवस्था तथा आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य किया गया है।

इस संबंध में जब हमारे संवाददाता ने एपी पाठक से बातचीत की तो उन्होंने कहा,

“जनसेवा किसी पद की मोहताज नहीं होती, इसके लिए मानवता का बोध होना चाहिए। मैं जीवन के अंतिम क्षण तक लोगों की सेवा करता रहूंगा।”

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