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*वन अधिकार अधिनियम लागू होने के बावजूद आदिवासी समुदाय अपने कानूनी अधिकारों के लिए लगातार संघर्षरत!*

 


 _रमेश ठाकुर_ 

 _रामनगर - नरकटियागंज_ _प०चम्पारण (बिहार)_ 

 _26-09-2025_ 



रामनगर प्रखंड के दोन क्षेत्र की उपेक्षा और वहाँ के जनजातीय समुदायों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर आवाज़ बुलंद हुई है। थारू और उरांव जनजाति बहुल यह इलाका चारों ओर जंगल और पहाड़ से घिरा है, जहाँ लगभग 25 गाँवों में 25,000 से अधिक आबादी जीवन की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।


बरसात के दिनों में सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो जाता है:-

पहाड़ी नदियों से सड़कें बह जाती हैं, जिसके कारण गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। चूँकि यह क्षेत्र टाइगर रिज़र्व में आता है, आए दिन जंगली जानवरों के हमले भी लोगों की जान के लिए खतरा बने रहते हैं।



अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित:- 

दशकों तक मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं थी। पूर्व सांसद स्व. बैदनाथ प्रसाद महतो के प्रयासों से BSNL का टॉवर लग पाया, लेकिन आज भी राशन, पेंशन और सरकारी योजनाओं का लाभ सभी योग्य लोगों तक नहीं पहुँच रहा।

ग्रामीणों ने बताया कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवज़ा और पुनर्वास में भी गड़बड़ी है। अधूरी सड़कें और पुल निर्माण के कारण दौन क्षेत्र हर साल देश से कट जाता है। स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह नदारद हैं, जिससे गर्भवती महिलाएँ और गंभीर मरीज जान जोखिम में डालकर दूर-दराज़ इलाज कराने जाते हैं। शिक्षा और रोजगार की स्थिति भी बेहद दयनीय है।


वन अधिकार अधिनियम के बावजूद संघर्ष:-

वन अधिकार अधिनियम, 200626-09-2025 के तहत जनजातीय समुदायों को उनकी परंपरागत वन भूमि और जीवन यापन का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन दौन क्षेत्र के लोग अब भी स्वच्छ जल, सम्मानजनक जीवन और मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं।

पर्यटन की अपार संभावनाएँ

सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस इलाके में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। होम-स्टे मॉडल, स्थानीय हस्तशिल्प, इको-टूरिज़्म और टाइगर रिज़र्व को विकसित कर यहाँ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा सकता है। नेपाल सीमा से सटा यह क्षेत्र “स्मार्ट गाँव” के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।

सरकार से प्रमुख माँगें

इस अभियान के तहत मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से माँग की गई है कि दोन क्षेत्र को विशेष योजना में शामिल किया जाए। साथ ही पक्की सड़क और पुल का निर्माण प्राथमिकता से हो, वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की ठोस योजना बने तथा पर्यटन को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र को “टाइगर रिज़र्व टूरिज़्म हब” के रूप में विकसित किया जाए।

लोक जागरण मंच के महामंत्री सईद सिद्दीकी ने कहा कि यह केवल सड़क और पर्यटन की समस्या नहीं है, बल्कि हजारों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों के जीवन, सुरक्षा और भविष्य का प्रश्न है। सरकार को अब दोन क्षेत्र की आवाज़ सुननी ही होगी।

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