*पत्रकार है यूट्यूबर नही जो कोई हमला करे!*
_ठाकुर रमेश शर्मा_
_रामनगर विधान सभा पश्चिमी चंपारण (बिहार)_
_दिनांक - 25-05 -2023_
भारतीय युवा पत्रकार संगठन
(B.Y.P.S) यंग जर्नलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के चंपारण इकाई जिसके अध्यक्ष मनोहर मनोज हैं। उन्होंने संपूर्ण भारत के लगभग 480 रिपोर्टर जो भारत के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स (प्रिंट )मीडिया का प्लेटफार्म है जिसके एक सूत्र में संगठित करने का काम मनोहर मनोज ने किया है। दिल्ली में 35 सालों से लगातार निवास करने वाले मनोहर मनोज (कोशांबी) निवासी हाल मुकाल तथा पूर्वजों का धरोहर निवास प्राचीन मेला स्थल राजवटिया निवासी है विगत लोकसभा चुनावो में प्रत्याशी बनकर चंपारण के सोए हुए जनता को जगाने का प्रयास करने वाले विद्वान, मृदुभाषी (P.I.V)
प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो का कार्ड होल्डर हैं। वरिष्ठ पत्रकार वर्तमान में वर्षों से भारत परिवर्तन अभियान के तहत लगातार चंपारण के कॉलेजों छात्रों को जागरुक भी करने का वीणा उठाया है। जिनका दूरभाष नंबर 9811069966 है। इस मई 2023 के अंतिम सप्ताह में जब वरिष्ठ पत्रकार सागर सूरज पर कतिपय अपराधी जो अराजकता के अंकुर है उन अपराधियों द्वारा जानलेवा हमला किया गया तो शीघ्र ही चंपारण रेंज के डीआईजी जयंत कांत को संज्ञान लेने की आवश्यकता है। भारतीय युवा पत्रकार संगठन के अध्यक्ष ने तथा ठाकुर रमेश शर्मा ने अपने व्यान के माध्यम से प्रार्थना किया तथा डीजीपी ऑफ बिहार आर एस भट्टी साहब को उन अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार करने का आदेश देने की बाबत प्रार्थना संगठन के माध्यम से किया। क्योंकि राजविंदर सिंह भट्टी वहीं DGP है जिन्होंने सहाबुद्दीन जैसे अपराधी को धूल चटवाकर पहली बार गिरफ्तारी का स्वाद चखाया था की नही ?
तो अब बिहार के पत्रकारों पर हमला करने वालों को क्यों बक्सा जाए ?
हमारे संगठन ने सुना है की इन दिनों डीआईजी के रूप में आए "चंपारण में आए जयंत , अब अपराधियों का होगा अंत"।
चाहे सरकार गठबंधन की हो महागठबंधन की
बिहार के DGP तथा चंपारण रेंज के DIG किसी भी सूरत में रिश्वत से गठबंधन कर नहीं सकते । (BIPS) के चंपारण रेंज के प्रमुख पत्रकार ठाकुर रमेश शर्मा, सतीश पांडे ( नरकटियागंज) शैलेश मणि, अमरेश सिंह (बगहा) ने भी भाई अजीरुद्दीन (बिनवलिया ) , बगहा - शिव शंकर सत्यार्थी, राकेश द्विवेदी( बब्लू) प्रकाश जी रामनगर ,कृष्णकांत तिवारी, संजय पांडे, राजीव पांडे, सुबोध मिश्र (साठी) बेतिया से रवि तिवारी, कृष्णकांत मिश्र, प्रेम चंद्र पांडे, बेतिया - विकास पाण्डेय, बाल्मीकि नगर से श्रीकांत गौनाहा से विजय वर्णवाल ,मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद आजाद जो आजाद पत्रकार हैं,आर्यन कश्यप सहित सैकड़ों पत्रकारों ने शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। नहीं तो बाध्य होकर बिहार के सभी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं प्रिंट मीडिया द्वारा आंदोलन किया जाएगा। जो प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति तक को खबर हो जाएगा ।
यहां तो आजकल खबर वाले ही खबर बनकर रह गए हैं क्यों? परंतु पुलिस महकमा क्यों है बेखबर ?
क्या पूर्व के उत्तर प्रदेश जैसा जंगलराज कायम होने वाला है ? उस अतीक अहमद के जमाने वाला ?अगर नहीं तो क्यों नहीं अब तक गिरफ्तारी क्यों नही हो सकी ? क्या सुप्रीविजन का इंतजार है? क्यों देरी हो रही है प्रवेक्षण में ?आज कल तो पॉक्सो जैसे मामले में भी छोटे पदाधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों को वर्गलाकर प्रयोक्षण में देरी करते है यह सोचकर की
"समथिंग इज बेटर दैन नथिंग" अगर एक पुलिस वाले के साथ यही घटना होती है तो सात थाने की पुलिस इकट्ठा होकर लाठियां चटकाती है तथा फर्जी सेक्शन सहित सभी संगीन धाराएं लगाकर आरोप पत्र समर्पित कर दिया जाता है। इस घटना के पीड़ित हमारे भाई तो वरिष्ठ पत्रकार है इनके प्रति पुलिस प्रशासन की संवेदनाएं कम क्यों हैं? यह तो तिरहुत परिक्षेत्र के IG साहब ही बता पाएंगे?


