_ठाकुर रमेश शर्मा पत्रकार - रामनगर, प०चंपारण बिहार_
_(मानवाधिकार एवं अपराध रिपोर्टर)_
_22-05-2023_
पर्यटकों के लिए बाल्मीकिनगर में खास व्यवस्था रहती है।इसलिए राज्यपाल ही क्यों,बिहार के पश्चिम चंपारण के बाल्मिकीनगर अंतर्गत थाड़ी गांव के दौरा करने के दौरान कुछ ही महिलाओं से बात किया।बहुत सी महिलाओं को निराशा हाथ लगी, क्योंकि उनके बातों को सुनने वाला कोई नहीं था।
चाटुकार की एक टोली हर जगह आगे आगे चलती है जो ब्यूरोक्रेट हो,राज्यपाल हो,केंद्र हो या बिहार स्तर के नेता ; सबके काफिले से बात करना कठिन कार्य होता है।कुछ महिलाओं के साथ कुछ खादी धारी नेता यह कहते सुने कि यह सभी आनंदी का भुजा खाने आते हैं।इन भुजा वालों को कुछ विकास के नाम पर तोहफा नहीं देते हैं क्यों ?
महामहिम राष्ट्रपति के बाद किसी भी राज्य के प्रतिनिधि राज्यपाल ही होते हैं जिनका प्रभाव राष्ट्रपति शासन के दौरान देखने को मिलता है। बिहार के राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर की अगुवानी में वरिष्ठ अधिकारियों के अगुवानी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस,पारा मिलिट्री,कुछ मिलिट्री भी तैनात नजर आए।बाद में 22-05- 2023 (सोमवार) को राज्यपाल महोदय का पुनः पटना वापसी बहुत ही शांति के माहौल में संभव हुआ।
हालांकि बिहार के प०चम्पारण ज़िले के बाल्मीकिनगर अंतर्गत ठाड़ी गांव में बिहार के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर के दौरे ने चम्पारण के जनजातीय ग्रामीणों को जगाया उम्मीद।
14 जनवरी 1964 को हुआ था ऐतिहासिक कार्य ,जब भैंसा लोटन का नाम वाल्मीकिनगर हो गया। चंपारण का हिल स्टेशन कहा जाने वाला छोटा जगह जहां भारत सहित विश्व के कौन-कौन से लोग घूमने आते हैं ।इसी रास्ते से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली से घूम कर लुम्बिनी वन जा कर वापस पुनः ज्ञानस्थली बोधगया जाते हैं तथा ज्ञान प्राप्त कर अपने निवास स्थल वापस होते हैं। इस बार बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भी ऐसे ही कुछ तोहफा हमारे चंपारण को देने वाले हैं उक्त बातें चंपारण के वरिष्ठ नेता मधुकर राय ने कहा।
राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर दो दिवसीय वाल्मीकिनगर दौरे पर रविवार दोपहर दो बजे वाल्मीकिनगर पहुंचे।
वे सड़क मार्ग से पटना से वाल्मीकिनगर आए। उन्होंने 25 घंटे के प्रवास में वे सबसे पहले पंचायती राज प्रतिनिधियों के साथ रविवार को ढाई बजे बैठक किया। इसके बाद वे ठाड़ी गांव गए।यहां स्वास्थ्य केन्द्र, विद्यालय, आंगनबाड़ी केन्द्र का भ्रमण व उज्जवला योजना के लाभुकों, स्वयं सहायता समूह, जीविका दीदीयों आदि से बात भी की। शाम में गंडक बराज व बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। कार्यक्रम के दूसरे दिन सुबह में पर्यटन क्षेत्र में किये गये कार्यों का निरीक्षण किया। दिन के 11 बजे वन विभाग के ऑडियो-वीडियो सभागार में अधिकारियों को संबोधित की। साथ ही यक्ष्मा रोकथाम, ग्रामीण आवास योजना, उज्जवला योजना, मध्यान भोजन योजना आदि की समीक्षा के साथ रेडक्रॉस के अधिकारियों के साथ
बैठक भी किया। इसके बाद दोपहर में बारह बजे सीमावर्ती जिलों, बन अधिकारियो के साथ सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, तस्करी, मद्य निषेध आदि मुद्दों की समीक्षा की। सोमवार यानी आज वे तीन बजे पटना के लिए प्रस्थान करेंगे।
दो दिवसीय दौरे पर राज्यपाल के वाल्मीकिनगर आगमन को लेकर हो रहे कार्यों को लेकर शनिवार को दिन भर पुलिस व प्रशासनिक के अधिकारी अलर्ट मोड पर रहे। पुलिस के अधिकारों जहां सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने को लेकर लगातार टास्क देते नजर आये वहीं प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा भी विभागवार लगातार काम की समीक्षा की जाती रहीं। वाल्मीकिनगर, ठाड़ी आदि जगहों पर हो रहे काम को फाइनल टच देने में जुटे रहे। इतना ही नहीं काम को अंतिम रूप देने को लेकर देर शाम तक काम होता रहा। सभी विभाग अपने-अपने हिस्से के काम को अंतिम रूप देता दिखा। शनिवार को ठाड़ी गांव में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे एसपी किरण कुमार गोरख जाधव ने बताया कि राज्यपाल के कार्यक्रम को लेकर तैयारियां चल रही है।


