_ठाकुर रमेश शर्मा - बेतिया, प० चंपारण ( बिहार)_
_दिनांक - 24-11- 2022_
हमारे बिहार में नीतीश कुमार ने बहुत से इतिहासिक काम किए जो पुरे विश्व में अलग है। धरती बनने के बाद पहली बार हुआ। ठीक उसी तरह जिस तरह संसार में हमारे लोकप्रिय भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने किया था। जैसे हमारे अटल जी ने पूरी दुनिया से अलग-अलग अनेकों काम किए जो किसी से न हुआ और ना होगा।जैसे - मिसाल के लिए विश्व के परमाणु संपन्न देशों में जो हमारे देश से आर्थिक, सामाजिक, रूप से दुगुने आगे हैं। परंतु वहां यह काबिले तारीफ कम नहीं हुआ था। जो भारत में पहली बार हुआ,आजादी के बाद विनिवेश मंत्रालय का सृजन हुआ।
जैसे भारत में पहली बार अटल जी की सरकार में विनिवेश मंत्रालय का सृजन किया गया, जिसमें सर्वप्रथम अरूण शोरी को विनिवेश मंत्री बनाया गया ।
ठीक उसी प्रकार बिहार में राज्य के मुख्यमंत्री ने दलित में संशोधन करके हीं तो महादलित शब्द तैयार करते हुए महादलित जाति का दर्जा दिया। तत्पश्चात (महादलित मिशन)का भी गठन किया गया।पूरे विश्व में ऐसी मिशन नहीं है, और ना ही ऐसी संशोधित जाति।
उसी का परिणाम है आज महादलित समाज का काफी उत्थान हुआ है और होता रहेगा।
"सात निश्चय योजना"
आखिर इसे नीतीश बाबू ने पाँच निश्चय क्यों नहीं रखा ? या दस निश्चय क्यों नहीं?
यह बहुत बड़ा रहस्य है। इसे पूरे बिहार में दो-तीन ही व्यक्ति जानते हैं,इस विचित्र रहस्य को।
वे कौन- कौन हैं ?
1- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार । 2-उनके विशेष सचिव ।
3- ठाकुर रमेश शर्मा पत्रकार । चौथा कोई भी न जानता है और नाही जानेगा।
क्यों ? यह भी एक रहस्य है।उसी सात निश्चय का बानगी है चंपारण की ऐतिहासिक पर्यटन स्थल का (चानकी गाँव) जिसे कुदरत ने विराजमान किया है। जब भी हमारे बिहार के मुख्यमंत्री चंपारण में आते हैं तो चानकीगढ़ मुझमें यानी पत्रकार-ठाकुर रमेश शर्मा से सांकेतिक लिहाज में पूछते है- "मैं और कितने दिन इंतजार करूं अपने तारणहार" नीतीश भैया की?
क्योंकि चानकी गढ़ ने इस अनपढ़ पत्रकार से कहा "बक्सर में भगवान विष्णु अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम आकर अपने भक्त अहिल्या का तारण किया,जो शीला से नारी बन गई"।
परंतु हमारे नितीश बाबू चंपारण के रास्ते से चंपारण का दौरा कर लिया परंतु नरकटियागंज रामनगर मुख्य पथ से क्यों नहीं किया?
इसी रास्ते में बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्व०केदार पांडेय का घर है।जो नीतीश बाबू के तरह केंद्र में रेल मंत्री भी रहे।
मुख्यमंत्री के पहले पथ निर्माण मंत्री,बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री (डिप्टी मिनिस्टर)रहे,
भारत के सिंचाई मंत्री भी रहे। सबसे पहले स्व० केदार पांडेय को चंपारण (रामनगर ) कि जनता ने नकार दिया । फिर भी नौतन बेतिया की जनता ने केदार पांडेय के सपनों को साकार किया।जिसके चलते सिंचाई मंत्री तक बने और उनकी जीवन को सिंचते हुए तोहफा मे तिरहुत कनाल नहर दिया। जिसमें बेतिया-नौतन की 64 पीढ़ी आबाद रहेगी।
आज नितीश बाबू को चंपारण के लोगों से बहुत अटूट प्रेम है। परंतु दोन कनाल ,तिरहुत कनाल जैसा तौफा दोन वासियों को क्यों नहीं दे देते हैं ? क्योंकि वे सिंचाई मंत्री बन नहीं सकते,भले मुख्यमंत्री 10 बार बन जाए। जब तक सिंचाई मंत्री बनेंगे नहीं , दोन वासियों के लिए रोएंगे। परंतु नहर नहीं दे पाएंगे।
अब दोन कनाल की विडंबना देखिए!
कहने के लिए दोन कनाल है।परंतु दोन क्षेत्र के कितने लोग लाभान्वित होते हैं।
उसी केदार पांडेय का घर है रामनगर नरकटियागंज- गोरखपुर- नरकटियागंज रेल पथ पर । लोग कहते हैं एक केदार पांडे का घर है, इसलिए नीतीश कुमार नहीं आते हैं कि कुछ औपचारिकताएं हैं जो प्रोटोकॉल में आती है। जिसके वजह से नीतीश कुमार इस पथ को चंपारण यात्रा के दौरान इस पथ से यात्रा पूरा करने से कतराते हैं। तो चानकी गढ़ जैसे ऐतिहासिक धरोहर का सपना शायद कभी पूरा ना हो,ऐसा प्रतीत होता नजर आ र हा है। हालाकि नौतन के लोगों को स्व० केदार पांडेय को लाख चाहने के बाद भी नौतन क्षेत्र के बाढ़ की तरह जननायक जनप्रेमी-जयप्रकाश नारायण के प्रलयकारी (सैलाब)1977 जिसमें कहा गया-। ""सन् 77 की ललकार, दिल्ली में जनता सरकार""
उसी 1977 में केदार पांडेय को नौतन की जनता ने नकार दिया था। जिसमें दूसरी और अंतिम बार केदार पांडेय ने हार का सामना किया।आज उसी सात निश्चय योजना के अंतर्गत महीने में चार बार ब्यूरोक्रेट जांच के नाम पर लाखों रुपए का सरकारी पेट्रोल फूककर रिश्वतखोरी करके चमुआ पंचायत के वार्ड नंबर-13 तथा वार्ड नं०14 में नलजल का पानी चानकी गढ़ की जनता को नहीं मिल पा रहा है जो वर्षों से प्यासी है। चानकी गढ़ की तरफ पर्यटक लग्जरी गाड़ियां लेे जाते हुए हमारे धरोहर कि यात्रा करते हुए ब्यूरोक्रेट की थू थू करते रहते हैं जिन्हें शर्म तो है नहीं।
कहां गई वह राशी जिसमें यहां पानी मुहैया कराना था ? अब डीएम बताऐंगे या सीएम,यह तो वक्त बताएगा। परंतु उस ऐतिहासिक शब्द सात निश्चय का क्या होगा ? जो निश्चय तो कर लिया परंतु पूरा नहीं किया। विलियम शेक्सपियर ने ठीक ही लिखा था-"when you make a promise ,then keep it."
- जब तुम कोई प्रतिज्ञा, निश्चय करो,उसे निभाओ। परंतु नीतीश कुमार जी के ब्यूरोक्रेट निभाने नहीं देते। चानकी गाँव लक्ष्मीनारायण की वजह से उसी में भूल जाते हैं।




