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बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का नया अध्याय

_रमेश ठाकुर - पश्चिम चंपारण,बिहार_

_दिनांक:- 10-09-2025_



बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अब बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ने के साथ-साथ कक्षा-कक्ष का माहौल भी जीवंत और उत्साहपूर्ण होता जा रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए राज्य के शिक्षकों की संस्था टीचर्स ऑफ बिहार की सकारात्मक पहल इसके पीछे अहम कारण मानी जा रही है।


टीचर्स ऑफ बिहार लगातार गतिविधि-आधारित शिक्षण और रचनात्मक कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी है और शिक्षक भी नई ऊर्जा के साथ कक्षा में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। यह प्रयास शिक्षा व्यवस्था में सार्थक बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।



शिक्षा विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने संस्था को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “टीचर्स ऑफ बिहार का प्रयास बच्चों की शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में सहायक है। यह पहल निश्चित रूप से बिहार की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा प्रदान करेगी।”


नवसृजित प्राथमिक विद्यालय खुटौना यादव टोला, पताही, पूर्वी चंपारण के शिक्षक एवं टीचर्स ऑफ बिहार के प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि गतिविधि आधारित शिक्षण से बच्चे अब सवाल पूछते हैं, चर्चा करते हैं और अपने विचार साझा करते हैं। यह बदलाव शिक्षण-प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सार्थक बना रहा है।


बच्चों ने भी नई पद्धति को उत्साह से स्वीकार किया है। एक छात्रा ने कहा कि अब पढ़ाई मजेदार लगती है और कठिन विषय भी आसानी से समझ आ जाते हैं। वहीं एक अन्य छात्र ने कहा कि अब स्कूल आने का मन करता है, पढ़ाई बोझ नहीं लगती।


शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था देश के लिए आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है।

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