_ठाकुर रमेश शर्मा_ _नरकटियागंज_रामनगर, पश्चिमी चम्पारण(बिहार) 25-02-2024_
देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर जमकर निशाना साधा और चेतवानी भी दी।
चीफ़ जस्टिस न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूर्ण सिंह की बेंच ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 19 और 22 के तहत पत्रकारों के मूल अधिकारों की स्वतंत्रता के खिलाफ पुलिस किसी भी पत्रकार के सोर्स नही पूछ सकती है और न ही न्यायालय,तब तक जब तक कि पत्रकारों के खिलाफ बिना जांच और पुख्ता सबूत के दर्ज मुकदमे और गवाही की जांच नही हो जाती है।
आज कल देखा जा रहा है कि पुलिस पत्रकारों की स्वतंत्रता हनन कर रही है क्योंकि अधिकतर मामले में पुलिस खुद को श्रेष्ठ बनाने के लिए ऐसा करती है जिस संबंध में उच्च न्यायालय ने अपना कड़ा रुख दिखाते हुए कहा है कि अगर पुलिस ऐसा करती पाई जाती है तो फिर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
ऐसे मामलो पर मुख्य न्यायधीश के आदेशों पर कार्यपालिका के सभी अधिकारियों की जिम्मेवारी बनती है की इस आदेश पर शीघ्र ही क्रियान्वयन कराए,अन्यथा कोर्ट का सीधा अवमानना हो जायेगा।क्योंकि अभी भी पत्रकारों के साथ जगह पर जगह उत्पीड़न जारी है।लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुछ नही समझने की बीमारी हो गई है।


