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*आज के राजनीतिक पार्टियों का यही हाल है।*

_ठाकुर रमेश शर्मा_ 

 _रामनगर,प०चम्पारण,(बिहार)_ 

 _07/05/2023_ 


एक बार एक वोटर लाइन में ही मर गया-

मृत्यु उपरान्त वह ऊपर यमराज के दरबार में पहुंचा- 

वहां चित्रगुप्त उसके कर्मो का खाता खोले बैठे थे- 

उसके कर्मो का खाता देखने के बाद चित्रगुप्त ने यमराज से कहा श्रीमान यह तो 50, 50 का मामला है- 

पलड़ा दोनों तरफ बिलकुल बराबर है,ऐसी स्थिति पहली बार हुयी है,आप आदेश दें कि क्या किया जाये इसे कहां भेजा जाये - स्वर्ग या नर्क-?

यमराज- ऐसी स्थिति में निर्णय लेने का अधिकार इसी का है,जो भी यह चुनना चाहे..

उन्होंने उसे एक दूत के साथ एक दिन नर्क और स्वर्ग में बिताने के लिये भेज दिया-

पहले दिन नर्क में पहुंचते ही उसने खुद को एक गोल्फ कोर्स में पाया, चारों तरफ हरियाली, खूबसूरत दृश्यावली के बीच उसे दूर एक छोटा सा एक क्लब नजर आया, वहां पहुंचते ही उसे उसके सभी पुराने मित्र मिल गये,

जो सभी बेहद खुश थे और मजे ले रहे थे, 

मित्रों के साथ दिन भर उसने ढेर सारा आनंद उठाया, अच्छा खाना खाया थोड़ी बढ़िया शराब भी पी-

आखिर उनसे विदा लेकर वह दूत के साथ स्वर्ग में पहुंचा, वहां सभी संत टाइप के संतुष्ट व्यक्ति भजन कीर्तन में लीन थे, दिन बीतता दिखा नहीं उसे- आखिर उसका जाने का समय हो गया-

दूत के साथ वह यमराज के पास पहुंचा..

यमराज ने उसका निर्णय जानना चाहा-


उसने कहा - महाराज स्वर्ग बहुत अच्छा है, वहां शान्ति भी है, लेकिन मैं तो नर्क में ही रहना चाहूंगा-असल आनंद वहीं पर है...

यमराज ने दूत को उसे नर्क में छोड़ कर आने के लिये कह दिया- 

पर अब तो नर्क के द्वार के अंदर घुसते ही वह चौंक गया, चारों तरफ उजाड़ बियाबान रेगिस्तान नजर आ रहा था, और उसके सभी मित्र फटेहाल अवस्था में वहां बिखरे पड़े कूड़े करकट में अपना भोजन तलाश रहे थे...

उसने दूत से कहा- यह क्या कल तो यहां दूसरा ही दृश्य था- 

दूत ने हँसते हुए कहा - 

कभी पृथ्वी पर चुनाव प्रचार नहीं देखा क्या-?? 

कल अभियान का दिन था, तुम्हे लुभाने का दिन था,

तुम्हे फसाने का दिन था-

अब तो तुम अपना वोट दे चुके हो- 

भुगतो अब ..

🙄😂😁😂😁😃

केजरीवाल से लेकर गहलोत तक इन सभी द्वारा - 

औकात ना होने पर भी ऐसे ही लुभा लुभा कर बाद में तुम्हें नरक में झोंकने की जुगत की जा रही हैं - 

अगर समझ है तो उनके रोज के बयानों व घोषणाओं की समीक्षा से ही आप खुद समझ सकते हो -

एक उदाहरण- 

अभी मैं , एक बडे अधिकारी से सरकारी घोषणा अनुसार श्रमिकों को लाभ दिये जाने पर चर्चा करने गया - पर उस अधिकारी ने साफ कह दिया - कि केवल कोरी घोषणा है, यह सब ना बजट दिया गया ना स्टाफ तो करें क्या-?


इसीलिये सोच समझ कर ही वोट दें-

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