_ठाकुर रमेश शर्मा_
_रामनगर,प०चंपारण,(बिहार)_
_18/04/2023_
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी वन माफियाओं द्वारा अगलगी की घटना को अंजाम देकर अधजली लकड़ियों को काटकर कुछ तो कोयला बनाया जाता है जो कपड़ा इस्त्री करने वाले धोबियो को सप्लाई किया जाता है तथा कुछ कम जले लकड़ियों को वन्य तस्कर कटकर औने पौने दाम पर बेच देते है।इस पेशा से कुछ चंद भ्रष्ट अधिकारी मालेमाल हो रहे है तथा जंगल कंगाल हो रहा है।
वीटीआर जंगल हरनाटांड रेंज, तरूअनवा में लगी भीषण आग लगने से अफरा तफरी मची हुई है। आग की लपटें ईतनी भयावह है कि 1 किलोमीटर दूर तक धु -धुकर जल रहा है। वीटीआर सदाबहार जंगल मे और कई हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गया.... जंगलों में गर्मी के दिनों में आग लगने का कारण है। गर्मी दिनों में अत्याधिक गर्मी में पेड़ों के बीच घर्षण होता है जिससे उसका तापमान बाढ जाता है और धीरे -धीरे जंगल की सुखी घास और सुखी पत्तियाँ घर्षण करती हुई पेड़ की टहनियाँ अपने प्रज्वलन ताप पर पहुँच जाती है, ईसलिए जंगलो में अपने आप आग लग जाती है ... जंगल में आग लगने को (दावानल) कहते हैं।
इस समय भारत के वनक्षेत्रों में बजट मजबूत किया गया है फिर भी मातहत अधिकारी घरों के अंदर सो कर ac में दिन काट रहे है तथा उधर वन माफिया गुल खिला रहे है।जिसे शीघ्र सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए तभी जल,जंगली जीव तथा पर्यावरण सुरक्षित रहेगी तथा मानव का अस्तित्व खतरे से बच पाएगा। ऐसा सोच महान समाजसेवी भाई शेख औरंगजेब के साथ गोला बाजार निवासी अखलाक अहमद मानवाधिकार कार्यकर्ता का कहना है।

