_रमेश ठाकुर,रामनगर, प०चम्पारण,_ _(बिहार)_ _17/09/2022_
रामनगर विधानसभा क्षेत्र में काफी हर्षोल्लास के साथ लोहार एवं मिस्त्री, कारीगर, मशीनरी कारखाना वाले समाज के लोगो ने विश्वकर्मा पूजा मनाया।
हर वर्ष 17 सितंबर को देवशिल्पी विश्वकर्मा की पूजा भारत वर्ष में काफी धूमधाम से मनाई जाती है।
ज्ञात हो कि 8 फरवरी 1862 में बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर में रेल कारखाना की स्थापना अंग्रेजों ने की थी,उसके बाद से हर वर्ष 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के रूप में मनाया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा दिवस भारत के कर्नाटक,असम,पश्चिम बंगाल, बिहार,उड़ीसा, झारखंड और त्रिपुरा आदि प्रदेश में आम तौर पर मनाया जाता है।
वर्ष 1863 में प्रथम रेलवे फाउंड्री की स्थापना के साथ रेल कारखाना जमालपुर में नया कीर्तिमान रचा।
1879 में रेल कारखाना जमालपुर देश का पहला ऐसा कारखाना बना जहां रोलिंग मिल की स्थापना की गई।
पश्चिम चंपारण के हरिनगर में हरिनगर शुगर मिल प्रबंधन एवं सभी कर्मियों द्वारा विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष की भांति उल्लास के साथ इस वर्ष भी मनाया गया।पूजा के उपरांत हजारों लोगों में प्रसाद का वितरण किया गया।उधर रामनगर क्षेत्र के सभी कल-कारखानों में उत्साह के साथ पूजा हुआ।
नरकटियागंज में अपने कारपेन्टर शॉप में पूरे स्टाफ के साथ धनंजय शर्मा, चिरान में टुन्नू जी,मलदहिया चिरान में गोलू उर्फ शाहील जी,रामनगर किशोरी के फुलवारी के पास के चिरान में गुड्डू जी, मंगुराहा में दूसरे गुड्डू जी,चमुआ में लोहार मिस्त्री रामायण शर्मा ने भी पूजा छोटे स्तर पर किया।नरकटियागंज के नरकटिया गाँव में पाशपत शर्मा,रामकृपाल शर्मा,विपिन शर्मा,रामविलास शर्मा,वीमा देवी,सुकट शर्मा ,संदेश शर्मा,प्रभु शर्मा,ब्रम्हदेव शर्मा,भूषण शर्मा आदि लोगों ने काफी हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाया।
नरकटियागंज के गोशाला रोड कारखानों में भाई संजय शर्मा एवं स्व०बुन्नीलाल शर्मा के पुत्र धनंजय शर्मा ने तथा शिवगंज चौक के फिरोज मिस्त्री ने भी धूम धाम से पूजा किया।
इस पूजा के उपरांत इस लोहार जाति के लोगों ने छोटी सी मीटिंग कर एक मायूसी जाहिर किया की अभी विगत दिनों में लोहार जाति को अनुसूचित जनजाति के दर्जे से बाहर करने के फैसले पर दु:ख भी जाहिर करते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से मार्महत है।क्योंकि लोहार जाति दुनिया बनी तभी से गरीब और फटेहाल है।संख्या में अल्प हैं।आर्थिक एवं सामाजिक रूप से भी काफी पिछड़ी है।इस जाति के 98% लोग और बाकी जातियों से काफी पिछड़े हुए। आप जहां भी पाएंगे इस जाति के लोगों का घर गांव के बाहर ही होता है,अपवाद को छोड़कर।
यह जाति पहले घुमकड़ी ही होती थी।
आज भी लोकतंत्र के चारों स्तंभों में इनकी संख्या नगण्य हैं।जैसे एमपी-एमएलए,आई०ए०एस०-आई०पी०एस० यानी विधायिका, कार्यपालिका पत्रकारिता एवं सर्वोपरि न्यायपालिका में तो नहीं के बराबर या लाखों करोड़ों में एक पाया जाता है,या वह भी नही। इन सब बातों को ध्यान में रखकर बिहार के लोहार सुप्रीम कोर्ट के दया के पात्र हैं,जहां डबल बेंच में यह पुनर्विचार के लिए याचिका लंबित हैं।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय की निगाह अगर इस लोहार जो लोहरा ही है पर पड़ जाए तभी कल्याण हो पाएगी और इस जाति के लोगो की दयनीय स्थिति में सुधार आएगी,जिसे भगवान विश्वकर्मा की कृपा तथा प्रसाद लोहार लोहरा जाति को मिल जाएगी।

