रमेश ठाकुर-रामनगर प०चम्पारण (बिहार)
दिनांक-04-09-2022
पश्चिम चंपारण के ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों में इन दिनों यानी कुछ वर्षों से आमतौर पर प्रसव के दौरान पेट खोलकर ऑपरेशन कर बच्चे को निकालना एक आम धंधा बन गया है।
खासतौर पर ग्रामीण-शहरी क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टर इस धंधे को कर रहे हैं। प्रसव पीड़ा होने पर जब परिजन महिला को ले जाते हैं,तब यह झोलाछाप डॉक्टर हल्की दर्द होने पर या ज्यादा पीड़ा होने पर जांच कर कहते हैं कि "आपको जच्चा चाहिए या बच्चा"।
परिजन दुखी होकर कहते हैं की दोनों चाहिए।उस परिस्थिति में डॉक्टर मुहमांगी राशि लेकर ऑपरेशन कर बच्चा निकाल देते हैं।
इस हालत में पीड़ित परिवार पर परेशानी के साथ आर्थिक भार पड़ता है। इसकी जांच पश्चिम चंपारण में भी शीघ्र होना चाहिए, जिससे यह धंधा बंद होगा तथा महिला उत्पीड़न रुकेगी।
सूबे के 34 जिलों में ऑपरेशन से प्रसव की जांच की जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की पॉपुलेशन रिसर्च सेंटर के टीम जिलों में जाकर ऑपरेशन से प्रसव मामले का सत्यापन करेगी।
इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने जिलों में स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजा है। इसमें निर्देश दिया है कि टीम के आने पर एक नोडल अधिकारी की तैनाती की जाए।
सूबे में पॉपुलेशन रिसर्च सेंटर की वडोदरा,श्रीनगर और पटना की टीम पड़ताल करेगी।किस जिले में कौन टीम जाएगी इसका विवरण भी जिले को भेज दिया गया है।

