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*जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो न्याय कहां मिले ?*

 


31-08-2022 आर०के०ठाकुर-प०चम्पारण


            अपराधियों का अपराध पकड़ में आ जाता है,परंतु पुलिस अपने अपराध को ड्यूटी का हिस्सा समझ लेती है।

ऐसा ही मामला है मिसाल के तौर पर भंगहा थाना कांड संख्या 50/22 -04-08-2022 जिसमे महिला उत्पीड़न की संगीन अपराध का धारा-448,354,354-(A),354-(B),504,506/34 में दर्ज तो हो गया,जो महज एफ.आई.आर. तो दर्ज हुआ,परंतु आज तक पीड़िता को संतावना तक नहीं मिला। इस प्रकरण का खेल रिश्वत पर चल रहा है। पीड़िता से बार-बार कहा जा रहा है "घटनास्थल का प्रत्यक्षदर्शी पेश करो"। क्या यह फिल्म का शूटिंग है जो पीड़िता घटना से पहले गवाह बैठा कर रखती?

इस घटना में पीड़िता के करीब अपने पराए जो आए उसे थाना प्रभारी नवीन कुमार यादव तथा केश के अनुसंधान पदाधिकारी नकार रहे हैं। इस केश का पूरा कमान थानाध्यक्ष संभाले हुए हैं। अभियुक्त को बचाने के लिए दिनांक 28-8-2022 को अपने मोबाइल नंबर-8873453252 से पीड़िता के पति के मोबाइल नंबर-6205010597 पर फोन कर धमका रहे थे कि तुम क्यों मुकदमा किए हो। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो पीड़ित इंसाफ की उम्मीद कहां से करें ?

इस प्रकरण में इज्जत लूटने का प्रयास सुभाष चौधरी ने किया है। जिसे थानाध्यक्ष महोदय ने सुभाष चौधरी से कहा है की "अपने गांव से 50 लोगों का हस्ताक्षर करा कर हमें तथा कोर्ट  में लगा दो तो तुम बरी हो जाओगे" ऐसा कहकर सुभाष गांव में एक ही परिवार से पाँच-सात लोगो का दस्तखत करा रहा है। अगर हस्ताक्षर से बरी होने का प्रावधान होता तो चारा घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव बिहार के 50% जनता का हस्ताक्षर करा कर बरी हो जाते।भंगहा थानाध्यक्ष ऐसा सलाह वहाँ क्यों नहीं दिया जो यहां एक गरीब के प्रकरण में अपने पार्टी बनकर कहानी रच रहे है तथा केश सुपरविजन में अभियुक्तो के बरी कराने का टेंडर लिए है।

पीड़िता के पति को उच्चाधिकारी तथा कोर्ट पर भरोसा है। उसे न्याय जरूर मिलेगी। 

इतना ही नही, पीड़िता के पति-लालबाबु चौधरी जो केरल में मजदूरी करने गए है। थानाध्यक्ष ने जो धमकाने जैसे लहजे में बात किया है उसका ऑडियो रिकॉर्डिंग उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका है जिसपर ध्यान करना होगा।

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