_रमेश ठाकुर के साथ मेराज आलम- पश्चिम चंपारण_
_दिनांक:- 12-09-2026_
गौनाहा। प्रखंड क्षेत्र की बेलसंडी पंचायत में पंचायत की विभिन्न योजनाओं में कथित अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायत के उप मुखिया छोटे खां ने मुखिया शंभू राउत, पंचायत सचिव नंदेलाल कुमार तथा तकनीकी सहायक विद्यानंद रवि पर पंचायत में संचालित योजनाओं में कथित गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए वरीय अधिकारियों से निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उप मुखिया के अनुसार, उन्होंने मामले को लेकर जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त सहित नरकटियागंज लोक शिकायत निवारण कार्यालय में आवेदन देकर जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद वरीय अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी (बीपीआरओ) अंगेश कुमार को सौंपी गई।
उप मुखिया का आरोप है कि जांच के दौरान उन्हें इसकी सूचना नहीं दी गई तथा बिना पर्याप्त स्थलीय जांच के ही शिकायत में लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए जांच रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी गई। उन्होंने सहयोग शिविर पोर्टल पर परिवाद संख्या REF775222 दर्ज कराते हुए दावा किया है कि पंचायत की योजनाओं में कथित राशि के दुरुपयोग से संबंधित शिकायत के साथ फोटो सहित अन्य साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए थे।
छोटे खां का कहना है कि शिकायत में जिन बिंदुओं को उठाया गया था, उनकी गहनता से जांच नहीं की गई। उनके अनुसार कार्यकारिणी पुस्तिका, मास्टर रोल, मजदूरों से पूछताछ तथा संबंधित कार्यस्थल के आसपास के लोगों से जानकारी लेने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की भी जांच की जानी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में इन बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया और पंचायत सचिव, मुखिया एवं तकनीकी सहायक को कथित तौर पर बचाने का प्रयास किया गया।
उप मुखिया ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जांच की सूचना देने के साथ-साथ जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि भी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसी को लेकर उन्होंने पूरे मामले की दोबारा किसी वरीय अधिकारी अथवा उच्चस्तरीय टीम से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच पारदर्शी तरीके से कराई जाती है तो पंचायत की योजनाओं में हुई कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वहीं, बीपीआरओ अंगेश कुमार ने उप मुखिया द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि संबंधित मामले की जांच के लिए वे स्थल पर दो बार गए हैं। उन्होंने कहा कि जांच के लिए आवेदक को साथ ले जाना अनिवार्य होने का कोई नियम नहीं है। बीपीआरओ के अनुसार, मामले को लेकर पंचायत सचिव से भी आवश्यक जानकारी ली गई है।
अब देखना यह है कि उप मुखिया द्वारा लगाए गए आरोपों तथा जांच प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के बाद वरीय अधिकारी मामले की पुनः उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। साथ ही जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पंचायत की योजनाओं में वास्तव में किसी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रक्रियागत अनियमितता हुई है या लगाए गए आरोप जांच में सही नहीं पाए जाते हैं।

