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*न्याय में देरी से टूट रहा भरोसा, लोहार आरक्षण मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग*



_रमेश ठाकुर — बगहा ,प. चंपारण(बिहार)_

_दिनांक : 05-08-2026_


जनतंत्र आवाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज किशोर शर्मा (आर.के. शर्मा) ने लोहार समाज के आरक्षण से जुड़े मामले की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर पटना हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के कारण लोहार समाज को लंबे समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है।


श्री शर्मा के अनुसार, लोहार आरक्षण से संबंधित मामले को लेकर वर्ष 2020 में पटना हाईकोर्ट में CWJC संख्या 4155/2020 दायर किया गया था। उनके मुताबिक, केस दाखिल होने के लगभग दो वर्ष बाद वर्ष 2022 में इसकी सुनवाई हुई और मामला आदेश के लिए रखा गया, लेकिन बाद में इसे फिर लंबित कर दिया गया।


उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में मामले की दोबारा सुनवाई हुई। इस दौरान सरकारी पक्ष के अधिवक्ता की ओर से विभिन्न कारणों के चलते लगभग 10 तारीखें निकल गईं। इसके बाद मामला पुनः लंबित हो गया। श्री शर्मा का कहना है कि वर्ष 2026 चल रहा है, लेकिन अब तक मामले को प्रभावी रूप से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कराने में कठिनाई बनी हुई है।


उन्होंने कहा कि लोहार विकास मंच की ओर से मामले को सूची में लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है।


*RTI और जन शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप*


आर.के. शर्मा ने बताया कि मामले की स्थिति और उससे संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए उनके द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन किया गया था। उनके अनुसार, लगभग सात महीने बाद प्रथम अपील पर सुनवाई का अवसर मिला और उन्होंने अपनी बात रखी, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।


उन्होंने बताया कि इसके बाद दोबारा RTI आवेदन किया गया, जिसका जवाब कई महीने बीतने के बाद भी लंबित है। अंततः उन्होंने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की है।


राज किशोर शर्मा ने यह भी कहा कि जन शिकायत के माध्यम से पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई, लेकिन उनके अनुसार उस पत्र पर भी अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मामले में स्वयं सुनवाई करने अथवा उचित दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।


*2016 के पत्र को लेकर भी उठाया सवाल*


आर.के. शर्मा ने लोहार समाज से जुड़े केंद्रीय गजट के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद से पारित और राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त कानून को किसी विभागीय पत्र के माध्यम से अधिसूचना जारी होने से रोकना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 14 जून 2016 को जारी एक पत्र के माध्यम से लोहार समुदाय से संबंधित केंद्रीय गजट की अधिसूचना को रोक दिया गया, जिसे उन्होंने कानून की भावना के विपरीत बताया।


उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी कानून को संसद से पारित कर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, तो किसी विभाग या अधिकारी को केवल पत्र जारी कर उसकी अधिसूचना रोकने का अधिकार किस आधार पर प्राप्त हो सकता है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।


*न्याय में देरी से जनता का भरोसा प्रभावित होने की बात*


जनतंत्र आवाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने राज किशोर शर्मा ने कहा कि यदि न्यायालयों में मामलों की सुनवाई इसी प्रकार वर्षों तक लंबित रहती है, तो इससे आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए समय पर न्याय मिलना बेहद जरूरी है।


श्री राजकिशोर शर्मा ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया कि न्यायिक मामलों की समयबद्ध सुनवाई और निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी पक्ष को वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा न करनी पड़े।


उन्होंने विशेष रूप से मांग की कि सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देते हुए उनकी सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो तथा संबंधित मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट कर शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए।

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