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*जीवित्पुत्रिका ( जिउतिया ) व्रत 25 सितंबर को,24 को नहाए खाय*

_रमेश ठाकुर - नरकटियागंज, रामनगर पश्चिमी चंपारण बिहार_

_दिनांक:- 17-09-2024_



आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित पुत्रिका व्रत मनाया जाएगा।इसे जिउतिया के नाम से भी जाना जाता है।इस बार यह 25 सितंबर को पड़ रहा है।

इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु एवं मंगल कामना को लेकर 24 घंटे का उपवास रखेंगी, वहीं खरजीउतिया करने वाली महिलाएं दिनभर उपवास रखकर शाम को तारा देखने के बाद अन्न - जल ग्रहण करेंगी। महिलाएं पितर-पितराईन  को झिगुनी के पत्ते पर खरी एवं तेल रखकर अर्पण करेंगी।

महिलाएं जीउतिया के भोर में चीलो सियारिन एवं पितर - पितराईन  को व्रती अपने कुल की परंपरा के अनुसार नैवेद्य अर्पण करती हैं।शाम को नहा धोकर जीवित वाहन  भगवान की पूजा अर्चना करेंगी,गले में जिउतिया की माला भी धारण करेंगी।

पत्रकार अजय कुमार दुबे ने बताते हुए कहा कि वंश वृद्धि एवं संतान की लंबी आयु के लिए महिलाएं इस व्रत को करती हैं। इससे संतान की ओर आने वाली विपदा दूर हो जाती है।

यह व्रत महाभारत के काल से जुड़ा हुआ है,जब भगवान श्री कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे पांडव पुत्र की रक्षा के लिए अपने सभी पुण्य कर्मों से पुनर्जीवित किया था,तब से ही स्त्रियां आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को निर्जला व्रत रखती हैं।

नहाए खाए के दिन भोर में दही और चूड़ा खाती हैं।इसमें उदय अष्टमी को व्रत करना चाहिए सप्तमी युक्त अष्टमी का त्याग करके अष्टमी युक्त नवमी तिथि को व्रत करना चाहिए और अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पालन करना चाहिए।

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